

मूल्यों और विचारधारा के प्रति प्रतिबद्ध रहे विशारद
बीकानेर। “सरल विशारद ने सरल विशारद होने के लिए बहुत कुछ खोया है। वे केवल विचारधारा के प्रति ही नहीं, बल्कि मूल्यों के प्रति भी प्रतिबद्ध रहे हैं।” ये विचार प्रख्यात कवि, आलोचक एवं नाटककार डॉ. नंदकिशोर आचार्य ने सुदर्शन कला दीर्घा, नागरी भंडार में कवि, आलोचक, एक्टिविस्ट एवं संपादक सरल विशारद के 89वें जन्मदिवस पर आयोजित ‘सरल समारोह’ में अध्यक्षीय उद्बोधन के दौरान व्यक्त किए। डॉ. आचार्य ने कहा कि सरल विशारद ने अपना संपूर्ण जीवन साहित्य को समर्पित किया है। उनकी साहित्यिक प्रतिबद्धता, वैचारिक दृढ़ता और मूल्यों के प्रति निष्ठा उनके व्यक्तित्व की विशिष्ट पहचान रही है। उनका जीवन साहित्य और सामाजिक सरोकारों के प्रति समर्पण का उदाहरण है। कार्यक्रम में अविनाश व्यास ने सरल विशारद के रंगकर्म से गहरे जुड़ाव को रेखांकित करते हुए कहा कि वे लंबे समय तक संकल्प नाट्य समिति में सक्रिय रहे। रंगमंच के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और सक्रिय भागीदारी उनके बहुआयामी व्यक्तित्व को दर्शाती है। समारोह के दौरान सरल विशारद की साहित्यिक रचनाओं का काव्यपाठ भी किया गया। प्रमोद कुमार शर्मा, नवनीत पांडे, मनीषा आर्य सोनी, इन्द्रा व्यास, मोनिका गौड़, जाकिर अदीब, बुनियाद हुसैन जहीन, डॉ. चंचला पाठक एवं आनंद मस्ताना ने उनकी कविताओं का वाचन कर उनकी साहित्यिक संवेदना और रचनात्मक दृष्टि को अभिव्यक्त किया। समारोह में सरल विशारद के साहित्यिक योगदान, वैचारिक प्रतिबद्धता और रंगकर्म से जुड़ाव का स्मरण करते हुए उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व को रेखांकित किया गया।
