

‘थार मरुस्थल के भागीरथ’ महाराजा गंगा सिंह के योगदान को किया याद
बीकानेर। महाराजा गंगा सिंह की जयंती के अवसर पर महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में कुलगुरु प्रो. नरसी राम बिश्नोई के मार्गदर्शन में ‘थार मरुस्थल के भागीरथ महाराजा गंगा सिंह’ विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने मरुस्थलीय क्षेत्र के विकास, जल प्रबंधन और जनकल्याण के लिए महाराजा गंगा सिंह के योगदान को याद किया। विषय प्रवर्तन करते हुए इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. मेघना शर्मा ने कहा कि मरुस्थल की हरियाली सदैव महाराजा गंगा सिंह की ऋणी रहेगी। अकालों से त्रस्त भूमि और जनता को खुशहाल बनाने के उनके प्रयासों ने उन्हें जन-जन में लोकप्रिय बनाया। उन्होंने कहा कि महाराजा गंगा सिंह की दूरदर्शिता और विकासपरक सोच ने बीकानेर रियासत के सामाजिक एवं आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मुख्य वक्ता डॉ. गोपाल व्यास ने महाराजा गंगा सिंह पर स्वयं द्वारा लिखित पुस्तक के संदर्भों के माध्यम से उनके विचारों और दूरदर्शी दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि महाराजा गंगा सिंह का मानना था कि नदियों के जल का उपयोग राज्य की सीमाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका अधिकतम उपयोग समूची मानवता के सुख और कल्याण की भावना से किया जाना चाहिए। उनका यह दृष्टिकोण जल संसाधनों के न्यायसंगत उपयोग और व्यापक जनहित की भावना को दर्शाता है। वक्ताओं ने कहा कि महाराजा गंगा सिंह का जीवन दूरदर्शी नेतृत्व, जनकल्याण और विकास के प्रति प्रतिबद्धता का उदाहरण है। मरुस्थलीय क्षेत्र में जल की उपलब्धता और खुशहाली के लिए उनके प्रयास आज भी प्रासंगिक हैं। कार्यक्रम में इतिहास विभाग के अतिथि शिक्षक डॉ. मुकेश हर्ष, डॉ. रीतेश व्यास, जसप्रीत सिंह, रिंकू जोशी, भगवान दास सुथार, डॉ. संजना चौधरी सहित अन्य उपस्थित रहे।
