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रंजन करने वाली श्रुति ही कथारंग : डॉ.चारण

कथारंग की लोक पर आधारित साहित्य वार्षिकी का लोकार्पण
बीकानेर। बीकानेर के गायत्री प्रकाशन से प्रकाशित साहित्य वार्षिकी ’कथारंग’ का लोकार्पण रविवार को बीकानेर जिला उद्योग संघ सभागार में डॉ. अर्जुनदेव चारण और मधु आचार्य ने किया। लेखक व पत्रकार हरीश बी. शर्मा द्वारा संपादित लोक पर आधारित इस साहित्य वार्षिकी में देश के 200 से अधिक लेखकों की रचनाएं हैं।
पारायण फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस समारोह में देश के प्रख्यात कवि-आलोचक व चिंतक डॉ.अर्जुनदेव चारण ने कहा कि भारतीय ज्ञान-परंपरा श्रुति की परंपरा है। जो श्रुति आपका रंजन करे, वह कथारंग है। कथारंग का लोक पर आधारित अंक इस समय में न सिर्फ साहित्य बल्कि समाज की भी जरूरत है, क्योंकि जो कुछ छूटता जा रहा है, उसे पाने के लिए लोक से प्रामाणिक कोई दूसरा मार्ग नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले दो सौ साल में पाश्चात्य शिक्षा पद्धत्ति ने हमें हमारी ज्ञान-परंपरा से काट दिया। इस वजह से लोक भी चेतना से छूटता चला गया।
मधु आचार्य ने कहा कि साहित्य को जन तक पहुंचाने के लिए शुरू किये गए हमारे अभियान ने जिस तरह से गति पकड़ी है, हमें संतोष है कि आने वाले दिनों में एक ऐसी पीढ़ी तैयार होगी जिसे साहित्य में रुचि होगी।
कथारंग के संपादक लेखक-पत्रकार हरीश बी. शर्मा ने कहा कि हमारा लोक पश्चिम का फोक नहीं है बल्कि यह भारतीय समाज का वह अलिखित संविधान है, जिसने युगों तक समाज को राह दिखाई है।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए शायर-नाटककार व अंक-अंग शास्त्री डॉ. कुमार गणेश ने कथारंग की यात्रा को एक परंपरा बताते हुए कहा कि यह एक भागीरथी र्प्रयास है, जिससे पूरे देश में साहित्य की गंगा प्रवाहित हो रही है। उन्होंने बताया कि कथारंग का यह अंक श्रीमती कुसुमलता शर्मा, कंचनलता शर्मा और नंदादेवी शर्मा को समर्पित है। समर्पित अंक कदम कुमार-गायत्री शर्मा, प्रवीण कुमार-मीनाक्षी शर्मा, चंद्रांशु-गायत्री शर्मा व भवानीशंकर भोजक को हरीश बी.शर्मा-गायत्री शर्मा ने भेंट किये।
इस अवसर पर मनमोहन कल्याणी, गौरीशंकर आचार्य, श्यामसुंदर व्यास, आशीष पुरोहित, विकास शर्मा आदि का कथारंग प्रकाशन में सहयोग के लिए सम्मान किया गया।

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