

RGHS में हालिया बदलावों पर पेंशनर्स महासंघ ने जताई आपत्ति, आदेश वापस लेने की मांग
बीकानेर। राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय पेंशनर्स महासंघ ने राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में किए जा रहे हालिया बदलावों पर चिंता व्यक्त करते हुए राज्य सरकार से इन आदेशों पर पुनर्विचार करने की मांग की है। महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष इंजीनियर वीरेंद्र सिंह सोलंकी एवं प्रदेश महामंत्री इंजीनियर अरविंद कौशल ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि RGHS जैसी जनकल्याणकारी योजना को अधिक सरल एवं प्रभावी बनाने के बजाय नई प्रशासनिक प्रक्रियाओं, आधार बायोमेट्रिक अनिवार्यता, अतिरिक्त सत्यापन एवं अन्य तकनीकी जटिलताओं से जोड़ने के कारण कर्मचारियों एवं पेंशनभोगियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि योजना को बीमा आधारित व्यवस्था के अधीन लाने से इसके मूल उद्देश्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। महासंघ के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र कुमार भटनागर, डॉ. अरुण कुमार शर्मा, डॉ. आर.एस. चावड़ा, मनफूल मांगलिया एवं मूलचंद जाट ने कहा कि वृद्ध पेंशनर्स, गंभीर रोगों से पीड़ित कर्मचारियों तथा दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले लाभार्थियों के लिए आधार बायोमेट्रिक जैसी अनिवार्यताएं व्यावहारिक समस्याएं उत्पन्न कर सकती हैं। तकनीकी खराबी, नेटवर्क समस्या अथवा सत्यापन में विलंब के कारण समय पर उपचार मिलने में बाधा आने की आशंका बनी रहती है। प्रदेश सचिव डॉ. भारत सिंह भीमावत, नेमाराम जाट, मोहनलाल चांगवाल, डॉ. भूपेंद्र उपाध्याय, महावीर शर्मा एवं प्रदेश संगठन मंत्री एस.बी. सहाय ने कहा कि हालिया प्रक्रियात्मक बदलावों के कारण लाभार्थियों को अस्पतालों में कैशलेस सुविधा प्राप्त करने के लिए अतिरिक्त औपचारिकताओं और तकनीकी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ रहा है, जिससे मरीजों एवं उनके परिजनों को मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
