

चन्द्र सिंह बिरकाळी प्रकृति चित्रण के अमर चित्तेरे थे
बीकानेर राजस्थानी पुरोधा-अमर कवि चन्द्र सिंह बिरकाळी आधुनिक राजस्थानी भाषा के महान साहित्यकार एवं प्रकृति काव्य के अमर चित्तेरे थे। यह उदï्गार कवि चन्द्र सिंह बिरकाळी की ३३वीं पुण्यतिथि पर आयोजित दो दिवसीय ‘ओळू’ के समापन समारोह की अध्यक्षता करते हुए साहित्याकार कमल रंगा ने व्यक्त किए।
रंगा ने आगे कहा कि चन्द्र सिंह बिरकाळी की काव्य साधना अपने आप में महत्वपूर्ण रही है। क्योंकि आपने रूढि़बद्ध, स्थूल और सप्रयास होने वाले रूपक के बंधन से मुक्त होकर कहन की सहजता को बल दिया, साथ ही आपने पारम्परिक छंद में अनुभूतियों को गहरी एवं सूक्ष्म रूप में प्रयोग कर छंद विधान में नई संभावनाएं निकाली। इस अवसर पर अपनी शब्दाजंलि अर्पित करते हुए कवि गिरीराज पारीक ने उन्हें लोक मन का कवि बताते हुए राजस्थानी प्रकृति चित्रण का महान रचनाकार बताया। चन्द्रसिंह बिरकाळी की 33वीं पुण्यतिथि पर आयोजित दो दिवसीय ‘ओळू’ कार्यक्रम के तहत प्रथम दिन युवा पीढ़ी के अनेक राजस्थानी समर्थकों ने बिरकाळी की कविताओं का मूल राजस्थानी एवं हिन्दी अनुवाद का वाचन कर सभी श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए शिक्षाविदï् भवानी सिंह ने कहा कि चन्द्र सिंह बिरकाळी की भाषा साहित्य साधना युवा पीढ़ी की प्रेरणा पुंज है। सभी का आभार संस्कृतिकर्मी अशोक शर्मा ने ज्ञापित किया।
