

करुणा और अहिंसा का संदेश जीवन को बनाता है श्रेष्ठ
बीकानेर। रांगड़ी चौक स्थित सुगनजी महाराज के उपाश्रय में आयोजित धर्मसभा में चित्तखरांजना महाराज ने 14 भावनाओं के अंतर्गत करुणा भावना का विस्तार से विवेचन किया। उन्होंने कहा कि करुणा, अहिंसा और क्षमा का भाव ही मानव जीवन को श्रेष्ठ बनाता है। उन्होंने भगवान महावीर और चंड कौशिक सर्प के प्रसिद्ध प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि जब चंड कौशिक ने भगवान महावीर को डसा, तब भी उनके शरीर से रक्त के स्थान पर दूध की धारा प्रवाहित हुई। यह प्रसंग भगवान महावीर की असीम करुणा, सहनशीलता और समभाव का प्रतीक है, जो प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में दया और अहिंसा अपनाने की प्रेरणा देता है। धर्मसभा में मुक्तांजना महाराज ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए आध्यात्मिक जीवन में करुणा और आत्मसंयम के महत्व पर प्रकाश डाला। प्रवचन के दौरान बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएँ उपस्थित रहीं। सभी ने करुणा, अहिंसा एवं स्वीकार भाव को अपने जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लिया।
