

मरु संस्कृति की विशिष्ट पहचान वैश्विक स्तर पर भी कायम
बीकानेर। राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान में ‘राजस्थान की मरु संस्कृति- विरासत, यात्रा-पर्यटन एवं वैश्विक आकर्षण’ विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया। गत चार वर्षों से आयोजित की जा रही ‘सुनी-लिखी-पढ़ी’ व्याख्यान श्रृंखला के अंतर्गत आयोजित यह कार्यक्रम पुरातत्त्व एवं संग्रहालय विभाग, बीकानेर तथा महाराजा मानसिंह पुस्तक प्रकाश, जोधपुर के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। कार्यक्रम में सैयद इनायत अली जैदी मुख्य वक्ता रहे। उन्होंने कहा कि राजस्थान की मरु संस्कृति अपनी विशिष्ट परंपराओं, जीवन-पद्धति और सांस्कृतिक विशेषताओं के कारण न केवल देश, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी अलग पहचान रखती है। उन्होंने मरु संस्कृति की विरासत, पर्यटन की संभावनाओं तथा इसे वैश्विक आकर्षण का केंद्र बनाने के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर आशीष अग्रवाल, डॉ. नितिन गोयल, डॉ. राजेन्द्र कुमार, राकेश शर्मा एवं श्रीमती मोनिका गौड़ ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में कर्नल हेम सिंह, डॉ. मेघना शर्मा, प्रो. बिन्दु भसीन, वेद अग्रवाल, डॉ. गिरिजा शंकर, राजाराम स्वर्णकार, प्रो. अजय जोशी एवं उमेश शर्मा सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।
