

शुभ 8 लक्षणों मंगल चिन्हों की संगीतमय प्रस्तुति
बीकानेर। गच्छाधिपति आचार्य प्रवर श्री जिन मणि प्रभ सूरीश्वरजी महाराज के आज्ञानुवर्ती गणिवर्य श्री मेहुल प्रभ सागर म.सा., मंथन प्रभ सागर, बाल मुनि मीत प्रभ सागर, बीकानेर की साध्वी दीपमाला श्रीजी व शंखनिधि के सान्निध्य में रविवार को ढढ्ढा कोटड़ी में भगवान के अष्ट प्रातिहार्य महोत्सव व दोपहर बच्चों का शिविर हुआ।
साध्वी श्री शंख निधि म.सा. ने बताया कि आचार्य मानतुंग ने भक्तामर स्तोत्र के श्लोक 28 से 35 में इन अष्ट प्रातिहार्य (मंगल चिन्हों) का अद्भूत वर्णन किया है। उन्होंने बताया कि जैन धर्म में 8 प्रतिहार्य जैन धर्म के तीर्थंकरों के साथ जुड़े शुभ 8 लक्षण हैं। यह लक्षण तब प्रकट होते है जब साधक केवलज्ञान यानि पूर्ण ज्ञान प्राप्त करता है। आठ प्रातिहार्य में अशोक वृक्ष सहनशीलता और शांति का, सिंहासन शक्ति और अधिकार का, तीन छत्र तीनों लोकों का, चामर ( चंवर ) सांसारिक मोह-माया से मुक्ति का, भामंडल यह दिव्य प्रकाश का घेरा है, जो तीर्थंकर भगवान के चारों और फैला रहता है।
