Bikaner Bikaner District Rajasthan साहित्य एवं कला

‘चोटी रै गांठ’ उपन्यास का लोकार्पण, ऐतिहासिक साहित्य की प्रासंगिकता पर हुई चर्चा

‘चोटी रै गांठ’ उपन्यास का लोकार्पण, ऐतिहासिक साहित्य की प्रासंगिकता पर हुई चर्चा
बीकानेर। मरूभूमि शोध संस्थान के तत्वावधान में राजस्थानी उपन्यास ‘चोटी रै गांठ’ का लोकार्पण एवं पुस्तक चर्चा समारोह राष्ट्रभाषा हिंदी प्रचार समिति के संस्कृति भवन में साहित्यकारों और साहित्य प्रेमियों की उपस्थिति में आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि साहित्यकार मालचंद तिवाड़ी ने कहा कि ऐतिहासिक उपन्यास के सृजन में इतिहास और कल्पना के संतुलन को बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है। उन्होंने कहा कि प्रमाणित ऐतिहासिक तथ्यों की विश्वसनीयता के साथ कथा की रोचकता, पात्रों की संवेदनात्मक प्रस्तुति और कल्पना का संतुलित प्रयोग ही किसी उपन्यास को सफल एवं कालजयी बनाता है। कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए साहित्यकार रवि पुरोहित ने कहा कि चाणक्य का जीवन केवल सत्ता प्राप्ति का आख्यान नहीं, बल्कि समग्र राष्ट्र-निर्माण का प्रतीक है। शिक्षा, अनुशासन, नेतृत्व, रणनीति और राष्ट्रीय हित जैसे मूल्य आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने मौर्यकाल में थे। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक उपन्यास वर्तमान समय में धैर्य, विवेक और दूरदृष्टि का संदेश देते हैं। कार्यक्रम में डॉ. चेतन स्वामी, डॉ. मदन सैनी, श्याम महर्षि, भगवती पारीक, श्रीभगवान सैनी, सीमा भोजक एवं महेश जोशी सहित अनेक वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर गजानंद सेवग, रामचन्द्र राठी, भंवरलाल भोजक, सत्यनारायण योगी, महावीर माली, बजरंग शर्मा, बाबूलाल सेवग, विजय महर्षि, छगनलाल सेवदा, विश्वनाथ तंवर, डॉ. रितेश व्यास, प्रवीण शर्मा, महावीर पंगाल, तुलसीराम चौरड़िया, श्याम सुंदर आर्य, गिरधारी कानूनगो, ओम गुरावा, विजय राज सेवग, मनीष शर्मा, भगवानदास शर्मा, शुभकरण पारीक, संजय शर्मा, राजीव श्रीवास्तव, नारायण शर्मा, लक्ष्मीनारायण सेवग, देवीलाल सेतरावा, विशाल स्वामी, राजू हीरावत, राजेश शर्मा, रमाकांत झंवर, संजय पारीक, कपिला स्वामी, आशा आचार्य, कांता भोजक, सरोज शर्मा, पुष्पा शर्मा, सरिता, पूनम सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *