

“पत्रकारिता ने मूल्यों से बनाई दूरी, बाजारवाद बना सबसे बड़ा संकट”
बीकानेर। बीकानेर प्रौढ़ शिक्षण समिति द्वारा कीर्तिशेष डॉ. श्रीलाल मोहता की पुण्यतिथि पर आयोजित कला-सृजनमाला शृंखला के अंतर्गत साहित्य, कला एवं सांस्कृतिक उन्नयन को लेकर परिसंवाद का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में “पत्रकारिता के संकट” विषय पर वरिष्ठ पत्रकारों, साहित्यकारों एवं सृजनकर्मियों ने अपने विचार व्यक्त किए। परिसंवाद की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार राजीव हर्ष ने की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पत्रकारिता का सबसे बड़ा संकट यह है कि समाचार पत्र अपने मूल्यों और सिद्धांतों से दूर होते जा रहे हैं तथा उन पर बाजारवाद हावी हो गया है। उन्होंने कहा कि आज केवल खबर छापना ही चुनौती नहीं है, बल्कि छपने योग्य खबरों को प्रकाशित नहीं करना भी गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। कार्यक्रम के सान्निध्य उद्बोधन में डॉ. ओम कुवेरा ने कहा कि पत्रकारिता को हमेशा मिशन के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि केवल व्यवसाय या पेशे के रूप में। उन्होंने कहा कि समाज में जागरूकता और लोकतांत्रिक मूल्यों को सशक्त बनाने में पत्रकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। विषय प्रवर्तन करते हुए प्रो. ब्रजरतन जोशी ने कहा कि पत्रकारिता वर्तमान में द्विमुखी और द्वंद्वात्मक संकटों से गुजर रही है। तथ्यों की अपेक्षा भावनाएं और बाजारवाद अधिक प्रभावी होते जा रहे हैं, जिससे निष्पक्ष पत्रकारिता प्रभावित हो रही है। खुले सत्र के दौरान शहर के कई वरिष्ठ पत्रकारों एवं सृजनकर्मियों ने भी अपने विचार रखे। इस अवसर पर पत्रकार मधु आचार्य, अजय जोशी, दीपचंद सांखला, अनुराग हर्ष, सुमित शर्मा, राजा सांखी तथा अजीज भुट्टा सहित अन्य वक्ताओं ने पत्रकारिता के समक्ष मौजूद चुनौतियों एवं समाधान पर अपने विचार व्यक्त किए।
