

नई पीढ़ी को उस्ता कला से रूबरू कराने की पहल, विद्यार्थियों ने लिया प्रशिक्षण
बीकानेर। बीकानेर की समृद्ध कला-विरासत और पारंपरिक सुनहरी कलम उस्ता कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से बीकानेर गोल्डन आर्ट अकादमी द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में पं. दीनदयाल उपाध्याय टी.टी. कॉलेज, बीकानेर के विद्यार्थियों ने उस्ता कला की जानकारी एवं प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए चित्रकार राम कुमार भादाणी से संपर्क किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने एक दिवसीय कला प्रशिक्षण में भाग लेकर बीकानेर की इस विशिष्ट पारंपरिक कला की बारीकियों को समझा। प्रशिक्षण के दौरान जागृति भोजक, ममता भादाणी, नन्दिनी व्यास, साक्षी भादाणी, काजल सुथार, राधा सुथार सहित अन्य विद्यार्थियों ने उस्ता कला के इतिहास, सुनहरी कलम के प्रयोग, इसकी पारंपरिक तकनीकों तथा वर्तमान समय में इस कला के संरक्षण की संभावनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। चित्रकार राम कुमार भादाणी ने विद्यार्थियों को उस्ता कला की विभिन्न बारीकियों से परिचित करवाते हुए बताया कि यह कला केवल चित्रांकन की तकनीक नहीं है, बल्कि बीकानेर की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान और पीढ़ियों से चली आ रही समृद्ध कलात्मक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस कला की विशिष्टता इसकी बारीक कारीगरी, सुनहरी रंगत और पारंपरिक शैली में निहित है। भादाणी ने कहा कि किसी भी पारंपरिक कला को जीवित रखने का सबसे प्रभावी माध्यम उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना, युवाओं को उसका प्रशिक्षण देना और उनके मन में उसके प्रति रुचि उत्पन्न करना है। युवा पीढ़ी की भागीदारी से ही हमारी सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित कर भविष्य में आगे बढ़ाया जा सकता है। बीकानेर गोल्डन आर्ट अकादमी द्वारा कला प्रशिक्षण के साथ-साथ बीकानेर की पारंपरिक कला-विरासत के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विद्यार्थियों का यह प्रशिक्षण कार्यक्रम स्थानीय कला परंपराओं से नई पीढ़ी को जोड़ने और उस्ता कला के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
