Bikaner Bikaner District Rajasthan

हाईकोर्ट के आदेशों को ठेंगा

भादाणी तलाई के आगोर में धड़ल्ले से अवैध निर्माण के आरोप, प्रशासन पर भी उठे सवाल
बीकानेर। राजस्थान हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेशों और जिला प्रशासन के प्रतिबंधात्मक निर्देशों के बावजूद बीकानेर की ऐतिहासिक भादाणी तलाई के जल बहाव क्षेत्र (कैचमेंट एरिया/आगोर) में कथित रूप से अवैध निर्माण जारी रहने के आरोपों ने शहरवासियों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। स्थानीय नागरिकों एवं भादाणी समाज के सदस्यों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में कहा गया है कि राजस्थान हाईकोर्ट ने एस.बी. सिविल रिट याचिका संख्या 11153/2011 में वर्ष 2012 में स्पष्ट आदेश दिए थे कि वर्ष 1955 के रिकॉर्ड में दर्ज नदी, नाले, तालाब, नाड़ी, बांध, जोहड़, पायतान एवं अन्य जल स्रोतों और उनके जल बहाव क्षेत्रों में किसी भी प्रकार का निर्माण पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। इसके बाद जिला कलेक्टर बीकानेर ने भी 8 अक्टूबर 2012 को ऐसे क्षेत्रों में निर्माण पर रोक लगाने के आदेश जारी किए थे। इसके बावजूद शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि भादाणी तलाई के आगोर क्षेत्र में बिना सक्षम अनुमति के व्यावसायिक एवं अन्य निर्माण कार्य किए गए हैं और वर्तमान में भी लोहे के स्ट्रक्चर खड़े कर प्राकृतिक जल निकासी मार्गों को बाधित किया जा रहा है। आरोप है कि प्राकृतिक नालों को मिट्टी डालकर भर दिया गया है, जिससे जल बहाव क्षेत्र को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि संबंधित भूमि सरकारी रिकॉर्ड में संरक्षित होने के बावजूद उस पर अवैध गतिविधियां जारी हैं और भूमि के अवैध विक्रय की आशंका भी जताई गई है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की तो भविष्य में जलभराव और पर्यावरणीय संकट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब हाईकोर्ट और जिला प्रशासन के स्पष्ट आदेश वर्षों से लागू हैं, तो आखिर इन आदेशों की खुलेआम अवहेलना कैसे हो रही है? यदि शिकायतें सही हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
शिकायतकर्ताओं ने जिला प्रशासन से मांग की है कि भादाणी तलाई के आगोर क्षेत्र में चल रहे कथित अवैध निर्माण को तत्काल प्रभाव से रुकवाया जाए, पहले से किए गए अवैध निर्माण हटाए जाएं तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
शहरवासियों का कहना है कि यदि जल स्रोतों और उनके प्राकृतिक बहाव क्षेत्रों पर कब्जे और निर्माण इसी तरह जारी रहे, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए तालाब और जल संरक्षण केवल इतिहास बनकर रह जाएंगे।

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