

किसान अपने खेत की सॉयल हेल्थ जानने के बाद ही कृषि की नई तकनीक अपनाये
बीकानेर। किसान अपने खेत की सॉयल हेल्थ जानने के बाद ही कृषि की नई तकनीक अपनाएं तभी हम अच्छी खेती कर पाएंगे। ये कहना है केन्द्रीय शुष्क बागवानी संस्थान बीकानेर के निदेशक डॉ. जगदीश राणे का जो स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय में ’’सुनियोजित कृषि तकनीकें’’ विषय पर आयोजित सात दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में किसानों को संबोधित कर रहे थे। समापन कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलसचिव डॉ. देवा राम सैनी ने की। कार्यक्रम में अतिथियों ने हाइड्रोपोनिक तकनीक के वर्टिकल टावर का उद्घाटन किया। साथ ही प्रशिक्षण पूरा करने वाले किसानों को अतिथियों ने सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया।
मानव संसाधन विकास निदेशालय कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित समापन समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. राणे ने कहा कि पानी हो या उर्वरक, फसल को उतना ही देना चाहिए जितनी जरूरत हो।उन्होंने कहा कि भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए किसान को घर बैठे पता चल जाएगा कि खेत में किस जगह पर पानी या उर्वरक देने की आवश्यकता है।
कुलसचिव डॉ. देवा राम सैनी ने कहा कि आज हमारी आवश्यकता बड़ी मात्रा में फसल उत्पादन की बजाय गुणवत्तापूर्ण फसल उत्पादन की है। अनुसंधान निदेशक डॉ. विजय प्रकाश ने कहा कि हमें कृषि को लेकर प्रधानमंत्री जी के ध्येय वाक्य ’मोर क्रॉप, पर ड्रॉप को ध्यान में रखते हुए परंपरागत खेती को छोड़कर कृषि की नई तकनीक को अपनाना है ताकि कम लागत में अधिक इनकम प्राप्त कर सकें। साथ ही कहा कि कृषि विश्वविद्यालय जल्द ही ड्रोन आधारित कृषि को लेकर ट्रेनिंग आयोजित करने जा रहा है।
कार्यक्रम में कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ पी.के.यादव, कृषि अनुसंधान केन्द्र के क्षेत्रीय निदेशक अनुसंधान डॉ. एच.एल.देशवाल समेत सभी डीन, डायरेक्टर, कृषि वैज्ञानिक समेत प्रशिक्षण ले रहे किसान उपस्थित रहे।
