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गौशालाओं में पेयजल संकट पर जताई नाराजगी, सरकार से 15 दिन में मांगी कार्ययोजना

गौशालाओं में पेयजल संकट पर जताई नाराजगी, सरकार से 15 दिन में मांगी कार्ययोजना
बीकानेर जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य की पंजीकृत गौशालाओं में व्याप्त पेयजल संकट को लेकर राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए 15 दिन के भीतर वित्त विभाग से अनुमोदित समयबद्ध कार्ययोजना (टाइम बाउंड शेड्यूल) प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी एवं न्यायमूर्ति प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने गो ग्राम सेवा संघ, बीकानेर की जनहित याचिका (डी.बी. सिविल रिट पिटीशन संख्या 912/2024) पर 6 जुलाई 2026 को यह आदेश पारित किया। मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मोतीसिंह राजपुरोहित ने पक्ष रखा। न्यायालय ने कहा कि वर्ष 2023-24 के बजट में घोषणा होने के बावजूद चार वर्षों में भी गौशालाओं में स्थायी पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की जा सकी, जो गंभीर चिंता का विषय है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल पानी के टैंकर जैसी अस्थायी व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि स्थायी समाधान लागू किया जाना आवश्यक है। सरकार द्वारा प्रस्तुत रिकॉर्ड के अनुसार राज्य में 3,861 अनुदानित पंजीकृत गौशालाएं संचालित हैं। इनमें 1,641 गौशालाओं में स्वयं का ट्यूबवेल है, जबकि 2,220 गौशालाओं में स्थायी पेयजल व्यवस्था के लिए ट्यूबवेल की आवश्यकता है। सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि 740 गौशालाएं अत्यधिक संकटग्रस्त हैं, जहां तत्काल पेयजल अवसंरचना विकसित करने की जरूरत है। सरकार ने इन गौशालाओं के लिए तीन चरणों में कार्ययोजना प्रस्तुत की है। पहले चरण में 387, दूसरे चरण में 234 तथा तीसरे चरण में 323 गौशालाओं में कार्य प्रस्तावित है।
खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि वर्ष 2022 से लगातार निर्देश दिए जाने के बावजूद अब तक स्थायी समाधान लागू नहीं हो पाया है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर प्रथम दृष्टया अवमानना की कार्रवाई बनती है, लेकिन सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दिए गए आश्वासन को देखते हुए फिलहाल इस पर विचार स्थगित किया जा रहा है। अधिवक्ता मोतीसिंह राजपुरोहित ने बताया कि हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद राज्य सरकार ने गौशालाओं के लिए 440 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है। यह राशि दो चरणों में खर्च की जाएगी। पहले चरण में 250 करोड़ रुपये से कार्य शुरू होगा, जबकि दूसरा चरण वर्तमान वित्तीय वर्ष के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
गो ग्राम सेवा संघ के प्रदेश कार्याध्यक्ष सूरजमाल सिंह नीमराना ने कहा कि वर्ष 2022 में गो संवर्धन निधि की राशि अन्य मदों में खर्च किए जाने के विरोध के बाद संगठन ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने कहा कि न्यायालय के हस्तक्षेप से अब गौशालाओं के लिए स्थायी पेयजल व्यवस्था का मार्ग प्रशस्त हुआ है, जिसके लिए संगठन ने हाईकोर्ट एवं इस संघर्ष से जुड़े सभी लोगों का आभार व्यक्त किया।

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