

श्रीमद्भागवत कथा का समापन, भक्ति-ज्ञान और वैराग्य के समन्वय का दिया संदेश
बीकानेर। श्रीलालेश्वर महादेव मंदिर शिवमठ, शिवबाड़ी में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का विधिवत समापन हुआ। सात दिवसीय कथा के समापन अवसर पर कथा प्रवाहक सच्चिदानंदगिरी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का मुख्य सार भक्ति, ज्ञान और वैराग्य है। भक्ति के बिना ज्ञान पचता नहीं और वैराग्य के बिना ज्ञान टिकता नहीं। इन तीनों का समन्वय ही जीवन के कल्याण का मार्ग है। जब तक जीव भक्ति, ज्ञान और वैराग्य को प्राप्त नहीं करता, तब तक उसका वास्तविक कल्याण संभव नहीं है। विरेश्वरगिरी जी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से परमात्मा की प्राप्ति के साथ सच्ची भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की अनुभूति होती है। उन्होंने कहा कि भागवत कथा मनुष्य को जीवन जीने के साथ-साथ मृत्यु का सामना करने की कला भी सिखाती है। विजेन्द्र सिंह भाटी ने बताया कि इस सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण आयोजन में न्यासीगण एवं कार्यकर्ताओं का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। आयोजन के सफल समापन पर सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया गया।
