

बावरा लोक के जागरूक कवि थे
बीकानेर। जनकवि बुलाकी दास बावरा की दसवीं पुण्यतिथि के अवसर पर हिंदी विश्व भारतीय अनुसंधान परिषद की ओर से महारानी सुदर्शन कला दीर्घा में ’स्मरण’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए वरिष्ठ साहित्यकार बुलाकी शर्मा ने कहा की बुलाकी दास बावरा प्रतिरोध और सामाजिक चेतना के सशक्त कवि थे। उन्होंने कहा कि उनके दौर के समकालीन लगभग सभी कवियों ने बावरा जी के काव्य यात्रा के महत्वपूर्ण चरणों को रेखांकित किया है। इस अवसर पर अध्यक्षता करते हुए मधु आचार्य आशावादी ने कहा कि बुलाकी दास बावरा की काव्य सृजन को यदि गहराई से देखा जाए तो हम उन्हें लोक का कवि पाते हैं। बावरा जी का काव्य निच्छल, निर्गुण भाव वाला रहा। वे सच को स्पष्टतया कहने का जज़्बा रखते थे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ उमाकांत गुप्त ने कहा कि बुलाकी दास बावरा के काव्य में जीवन के लगभग सभी रंगों को हम देख सकते हैं। जहां एक और श्रृंगार के गीत है तो वहीं दूसरी ओर प्रतिरोध की कविताएं भी हैं । कार्यक्रम का संचालन करते हुए साहित्यकार नगेन्द्र नारायण किराडू ने बुलाकीदास बावरा के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के आरंभ में आत्माराम भाटी ने स्वागत उद्बोधन दिया एवं हिंदी विश्व भारतीय अनुसंधान परिषद की ओर से डॉ मोहम्मद फारुख चौहान ने आभार ज्ञापित किया।
