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तपस्या हजारों रोगों की अनुपम औषधि

तपस्या हजारों रोगों की अनुपम औषधि
बीकानेर। श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, गंगाशहर की ओर से अनिता देवी नाहटा के मासखमण तप की अनुमोदना एवं अभिनंदन कार्यक्रम तेरापंथ भवन, गंगाशहर में आयोजित किया गया। इस अवसर पर साधु-साध्वियों एवं वक्ताओं ने तपस्या के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए तपस्विनी के प्रति अनुमोदना व्यक्त की। त्रिशला कुमारी ने कहा कि तपस्या हजारों रोगों की अनुपम औषधि है। तपस्या जहां काया को कुंदन बनाती है, वहीं मन में प्रसन्नता, शांति और सुकून का अहसास कराती है। साध्वी सम्यक्त्व यशा ने तपस्या के क्रमिक आध्यात्मिक प्रभाव को समझाते हुए कहा कि जब केवल शरीर तपता है तो अहंकार बढ़ सकता है, लेकिन शरीर और इंद्रियां तपती हैं तो संयम बढ़ता है। शरीर, इंद्रिय और मन के तपने से आत्मा के द्वार खुलते हैं तथा शरीर, इंद्रिय, मन और बुद्धि के तपने पर आत्मसाक्षात्कार की अनुभूति होती है। जतन लाल संचेती ने कहा कि आत्मशोध की प्रक्रिया में तप के माध्यम से निरंतर परिमार्जन होता है। उन्होंने अनिता देवी नाहटा के तप की अनुमोदना करते हुए उनके आत्मिक साधना-पथ की सराहना की।

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