

भैरवनाथ के दरबार में उमड़ेगी आस्था की गंगा
बीकानेर। बीकानेर से 24 किलोमीटर दूर स्थित ईष्टदेव कोडमदेसर भैरव मंदिर एक ऐसा स्थान है जहाँ लोग मन्नतें पूरी होने पर या विशेष दिनों, जैसे अष्टमी, चतुर्दशी, और अमावस्या पर दूर-दूर से पैदल चलकर आते हैं। प्रतिवर्ष भादवे महीने मे लगने वाला यह मेला इस वर्ष 4 और 5 सितंबर को भव्य रूप से मेला भरने जा रहा है।
पुजारी परिवार के तेजकरण गहलोत ने बताया कि इस अवसर पर मंदिर को विशेष श्रृंगार और सजावट से सुसज्जित किया जाता है। प्रातःकालीन आरती के समय भव्य श्रृंगार, दीप-प्रज्वलन और शंख-घंटी की ध्वनि से सम्पूर्ण परिसर गूंज उठता है। श्रद्धालुओं का स्वागत सिंदूर तिलक लगाकर किया जाता है और प्रसाद वितरण का क्रम निरंतर चलता रहता है। दर्शन के लिए बांस बलियों से लाइनबद्ध व्यवस्था की जाती है जिससे हजारों श्रद्धालु सहज रूप से बाबा के दर्शन कर सकें। पुलिस प्रशासन ने भी इस बार विशेष तैयारियाँ की हैं। गजनेर थानाधिकारी सुभाष गोदारा ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु मंदिर परिसर से बाहर बस व बड़े वाहनों के लिए अलग से पार्किंग की व्यवस्था की गई है। मेले में भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष पुलिस बल तैनात रहेगा। गांव में प्रवेश करने वाले सभी भारी वाहनों पर प्रतिबंध रहेगा और मंदिर से 500 मीटर के दायरे तक दोपहिया व चारपहिया वाहनों की एंट्री पूरी तरह बंद कर दी गई है, केवल पदयात्रियों को प्रवेश मिलेगा। राजमार्गों पर पुलिसकर्मी पदयात्रियों की सहायता और मार्गदर्शन के लिए मौजूद रहेंगे।
श्रद्धा के सागर पर भारी अव्यवस्थाओं का बोझ
आस्था और भीड़ का केंद्र होने के बावजूद कोडमदेसर भैरव मेला इस बार भी अव्यवस्थाओं और समस्याओं से जूझ रहा है। आगामी 4 और 5 सितंबर को लगने वाले इस मेले में हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे, लेकिन मंदिर परिसर और आसपास की व्यवस्थाएँ प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोल रही हैं।
मंदिर के पुजारी परिवार के रामेश्वर लाल गहलोत ने बताया कि बरसात के चलते मंदिर परिसर और मार्ग कीचड़ से पटे पड़े हैं। श्रद्धालुओं के लिए पैदल चलना भी मुश्किल है, वहीं दोपहिया, तीनपहिया और चारपहिया वाहनों का आवागमन अवरुद्ध हो जाता है। भारी वाहनों के लिए यह मार्ग प्रतिबंधित होने के बावजूद, टोल टैक्स बचाने के लिए ट्रक और ट्रेलर इसी रास्ते से गुजरते हैं जिससे स्थिति और बिगड़ जाती है।
