

इतिहास केवल राजाओं का नहीं, आम जनजीवन की वस्तुओं में भी जीवित रहता है
बीकानेर। अजित फाउंडेशन द्वारा आयोजित मासिक संवाद कार्यक्रम में ‘अतीत की प्रतिध्वनियां : भारतीय उपमहाद्वीप की भौतिक संस्कृति’ विषय पर इतिहासवेत्ता डॉ. नीतिन गोयल ने कहा कि इतिहास केवल राजाओं और युद्धों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह उन साधारण वस्तुओं में भी जीवित रहता है जिन्हें हम प्रतिदिन देखते, छूते और उपयोग में लेते हैं। उन्होंने कहा कि मौन वस्तुएं लिखित इतिहास की अपेक्षा कहीं अधिक प्रभावशाली ढंग से अतीत की कहानी कहती हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. अशोक शर्मा ने कहा कि फड़ चित्रकला जैसी पारंपरिक लोककलाओं को संरक्षण और प्रोत्साहन देना समय की आवश्यकता है। इससे विलुप्त होती हमारी सांस्कृतिक धरोहरों का पुनरुत्थान संभव होगा। मुख्य अतिथि डॉ. राकेश किराड़ू ने कहा कि कला की कोई सीमा नहीं होती। किसी भी कला का मूल उद्देश्य समाज, संस्कृति और मानवीय मूल्यों को अभिव्यक्त करना है। संस्था समन्वयक संजय श्रीमाली ने कहा कि हमारी पारंपरिक चित्रशैलियां देश की अमूल्य धरोहर हैं, जिनके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए गंभीर प्रयास किए जाने चाहिए। कार्यक्रम में नदीम अहमद नदीम, अरमान नदीम, हनीफ उस्ता, गिरिराज पारीक, मोहम्मद फारूक, सुनीता श्रीमाली, उषा बिस्सा, शिव दाधीच, बाबूलाल, गौरीशंकर शर्मा सहित अनेक युवा-युवतियों ने भाग लिया।
