

श्री रामकथा अमृतोत्सव में वनवास एवं केवट प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भावविभोर किया
बीकानेर। श्री रामकथा अमृतोत्सव में राजा दशरथ-कैकई संवाद, भगवान श्रीराम, लक्ष्मण एवं माता सीता के वनगमन तथा भगवान श्रीराम और केवट प्रसंग को सचेतन झांकियों, मार्मिक प्रवचनों, रामचरित मानस की चौपाइयों एवं भक्तिगीतों के माध्यम से भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया गया। पंडित पुरुषोतम व्यास ने कथा वाचन करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम का वनवास प्रसंग भारतीय धर्म एवं संस्कृति में त्याग, कर्तव्यनिष्ठा और आदर्श जीवन का सर्वोच्च उदाहरण है। उन्होंने कहा कि रघुकुल की परंपरा का निर्वहन करते हुए भगवान श्रीराम ने अपने पिता के वचनों की मर्यादा बनाए रखी, जो आज भी समाज को प्रेरणा देती है। सोमानी परिवार की ओर से आयोजित कथा में श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर नजर आए और भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
