

टैगोर जयंती पर मातृभाषा और बाल साहित्य पर हुई सार्थक चर्चा
बीकानेर। प्रज्ञालय संस्थान द्वारा गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की जयंती के अवसर पर “मातृभाषा एवं बाल साहित्य” विषयक गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साहित्यकारों एवं भाषा प्रेमियों ने बाल साहित्य और मातृभाषा के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। साहित्यकार कमल रंगा ने कहा कि बाल साहित्य का सृजन अपने आप में एक चुनौतीपूर्ण कार्य है, क्योंकि इसमें बच्चों की संवेदनाओं, कल्पनाओं और मानसिक स्तर को ध्यान में रखना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जब बाल साहित्य मातृभाषा में लिखा जाता है, तब उसकी प्रभावशीलता और सार्थकता और अधिक बढ़ जाती है, क्योंकि मातृभाषा बच्चे के भावनात्मक और सांस्कृतिक विकास से सीधे जुड़ी होती है। गोष्ठी में राजेश रंगा, हरिनारायण आचार्य, हेमलता व्यास, नवनीत व्यास, कन्हैयालाल पंवार एवं राहुल ने भी मातृभाषा के संरक्षण, बाल साहित्य के महत्व तथा नई पीढ़ी को भाषा और संस्कृति से जोड़ने की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त किए।
