

मकान तोड़ने पहुँची बीडीए टीम को लोगों के विरोध के चलते लौटना पड़ा
बीकानेर शहर जहां एक ओर अपनी वर्षगांठ के उत्सव में डूबा हुआ था, वहीं दूसरी ओर पॉश कॉलोनी सादुलगंज में स्थानीय निवासियों और प्रशासन के बीच तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिली। बीकानेर विकास प्राधिकरण (बीडीए) की टीम एक मकान को तोड़ने की कार्रवाई के लिए मौके पर पहुंची, लेकिन स्थानीय लोगों के कड़े विरोध के चलते उन्हें बिना किसी कार्रवाई के वापस लौटना पड़ा। जानकारी के अनुसार, सेवानिवृत्त एएसआई हनुमानदान चारण के मकान को तोड़ने के उद्देश्य से बीडीए की टीम पुलिस जाब्ते के साथ सादुलगंज पहुंची थी। जैसे ही कार्रवाई शुरू करने की तैयारी हुई, स्थानीय निवासी और पूर्व पार्षद मनोज विश्नोई मौके पर पहुंचे और इसका विरोध किया। मनोज विश्नोई ने अधिकारियों के सामने स्पष्ट किया कि संबंधित क्षेत्र के आठ मकानों को सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार तत्कालीन नगर विकास न्यास (यूआईटी) सचिव द्वारा विधिवत पट्टे जारी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद बीडीए इन मकानों को कच्ची बस्ती पर अतिक्रमण मानते हुए बार-बार तोड़फोड़ की कार्रवाई करने पहुंच जाता है, जो पूरी तरह अनुचित और अन्यायपूर्ण है। इस दौरान मौके पर मौजूद तहसीलदार आकांक्षा गोदारा और सदर थानाधिकारी सुरेन्द्र पचार के साथ विश्नोई की तीखी बहस भी हुई। विश्नोई ने बताया कि इन मकानों से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज पहले ही यूआईटी और बीडीए को सौंपे जा चुके हैं, फिर भी बार-बार इस तरह की कार्रवाई से मकान मालिकों को परेशान किया जा रहा है। करीब लंबे समय तक चली बहस और तर्क-वितर्क के बाद अंततः प्रशासनिक टीम को बिना किसी कार्रवाई के लौटना पड़ा। मनोज विश्नोई ने कहा कि वे जल्द ही जिला कलेक्टर से मुलाकात कर इस मामले में शिकायत दर्ज करवाएंगे और सभी तथ्यात्मक दस्तावेज प्रस्तुत करेंगे, ताकि मकान मालिकों को बार-बार होने वाली इस परेशानी से राहत मिल सके। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर शहर में प्रशासनिक कार्रवाई और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
