

तपस्वियों का किया सम्मान
बीकानेर। जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा के तत्वावधान में तीन दिवसीय वर्षीतप अभिनंदन समारोह का शुभारंभ मुनि अमृत कुमार के पावन सान्निध्य में बोथरा भवन में हुआ। कार्यक्रम में वर्षभर की कठिन तपस्या पूर्ण करने वाले साधकों का भावभीना अभिनंदन किया गया। मुनि अमृत कुमार ने वर्षीतप की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह तप प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव द्वारा प्रवर्तित है, जिन्होंने लगभग 13 माह तक निरंतर तप किया था। उन्होंने कहा कि वर्षीतप आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का श्रेष्ठ माध्यम है। इस अवसर पर मुनि उपशम कुमार ने तप को “कर्मों की गंगा” बताते हुए कहा कि इसमें स्नान का सौभाग्य केवल शुभ कर्मों के उदय से ही प्राप्त होता है। उन्होंने तपस्या के महत्व को रेखांकित करते हुए साधकों को प्रेरित किया। समारोह के प्रथम दिन तेरापंथी सभा द्वारा 10 तपस्वियों का अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर नवरतन बोथरा, लूणकरण छाजेड़, अमर चंद सोनी सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का वातावरण बना रहा।
