

स्थापना दिवस पर साफा-पगड़ी कला कार्यशाला आयोजित, संस्कृति संरक्षण पर जोर
बीकानेर। राजस्थानी साफा पगड़ी कला एवं संस्कृति संस्थान तथा थार विरासत संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में 539वें बीकानेर स्थापना दिवस के अवसर पर “उछब थरपना” के तहत दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में चंदे की पारंपरिक कला के साथ-साथ सभ्यता और संस्कृति के प्रतीक साफा-पगड़ी के विभिन्न स्वरूपों का अवलोकन, प्रशिक्षण एवं व्याख्यान भी आयोजित किया गया। प्रतिभागियों को साफा बांधने की विभिन्न शैलियों की जानकारी दी गई तथा इसके सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राजेश रंगा एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में हंसराज देवड़ा उपस्थित रहे। इस अवसर पर राजेश रंगा ने कहा कि राजस्थान में साफा-पगड़ी केवल परिधान नहीं, बल्कि पहचान, सम्मान और समृद्ध संस्कृति का प्रतीक है। इसे संजोकर रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। कार्यक्रम में जयश्री सुथार, मीनाक्षी पुरोहित, मोहित पुरोहित, आदित्य पुरोहित, केशव ओझा, वासु व्यास, मयंक व्यास, हरि उपाध्याय, तपेश सुथार, बाबू स्वामी, प्रियांशु स्वामी, डूगू सुथार सहित अनेक प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यशाला के माध्यम से युवा पीढ़ी को अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ने का संदेश दिया गया।
