Bikaner Bikaner District Rajasthan

पंच परमेष्ठी ने प्राणी मात्र की रक्षा का संदेश दिया

पंच परमेष्ठी ने प्राणी मात्र की रक्षा का संदेश दिया
बीकानेर। गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर म.सा. ने सुगनजी महाराज के उपासरे में शांति व सर्व कल्याण मंत्र ’’ऊं सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे संतु निरामयाः, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चित् दुःखमाप्नुवात्’’ सुनाते हुए कहा कि भारतीय धर्म व संस्कृति सभी प्राणियों के सुख की कामना करती है।
उन्होंने कहा कि जैन धर्म के सभी तीर्थंकरों, सिद्धों, आचार्य, उपाध्याय व साधुओं की पंच परमेष्ठी ने प्राणी मात्र की रक्षा, अहिंसा, करुणा व क्षमा का संदेश दिया है। दान के महत्व की विवेचना करते हुए कहा तीर्थंकर परमात्मा को दिया गया दान स्वर्णदान, सिद्ध, उपाध्याय, आचार्य व साधुओं को प्रदत रजत दान, सुपात्र दान, साधार्मिक पात्र का दान सामान्य तथा अन्य जरूरत मंद को दिया गया अनुकंपा दान कहलाता है। दान देने में सुपात्र-कुपात्र की चेतना रखे तथा निष्काम भाव रखें। सुपात्र को दान देने से धर्म का मर्म समझ आता है तथा पुण्य की प्राप्ति होती है।

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