

ज्ञान की पूजा व देव वंदन से ज्ञानावर्णीय कर्मों का क्षय
बीकानेर। गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर, मुनि मंथन प्रभ सागर, बाल मुनि मीत प्रभ सागर, बीकानेर की साध्वी दीपमाला श्रीजी व शंखनिधि म.सा. के सान्निध्य में रविवार को रांगड़ी के चौक के सुगनजी महाराज के उपासरे में सुबह नौ बजे से ज्ञान पंचमी की पूजा, देव वंदन व आराधना की गई। आराधना के बाद ज्ञान वाटिका का विशेष सत्र हुआ। रविवारीय ज्ञान शाला में हुई विभिन्न प्रतियोगिताओं में अव्वल बच्चों को पुरस्कृत किया गया। गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर म.सा. ने रविवार को प्रवचन में कहा कि ज्ञान पंचमी की ज्ञान की पूजा, आराधना, उपवास, देव वंदन करने से ज्ञानावर्णीय कर्म क्षय होता है। मन, बुद्धि निर्मल होती है तथा धर्म-आध्यात्म के माध्यम से मोक्ष का मार्ग मिलता है। ज्ञान पंचमी पर गणिवर्य, मुनि व साध्वीवृंद के नेतृत्व में शुभता, सौभाग्य,ज्ञान और आराधना की पवित्र, पूजनीय व प्रेरणादायक और ज्ञानवर्द्धक शास्त्रों, ग्रथों व पुस्तकों का पूजन तथा ज्ञान की आराधना की। अनेक श्रावक-श्राविकाओं ने आत्म निरीक्षण करते हुए उपवास रखे तथा ज्ञान, सुख और सर्वज्ञता की प्राप्ति के लिए देव वंदन किया। मुनि मंथन प्रभ सागर ने शांत क्रांत संघ के नवकार भवन में ज्ञान पंचमी पर सूत्रों का वांचन किया।
