

आत्मा शरीर को जीवन और महत्व देती है
बीकानेर। गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर म.सा. ने शनिवार को रांगड़ी चौक के सुगनजी महाराज के उपासरे में चातुर्मासिक प्रवचन में कहा कि आत्मा सूक्ष्म चैतन्य सता है जो अजर-अमर होती है, शरीर हाड-मांस का क्षण भंगुर नाशवान ढांचा है। आत्मा के बिना शरीर शव हो जाता है। आत्मा शरीर को जीवन और महत्व देती है। आत्मा शरीर से दूसरे शरीर में परिभ्रमण करती है उन्होंने कहा कि व्यक्ति के शरीर से बहुमूल्य आत्मा का निकल जाना ही मृत्यु है। आत्मा के बिना शरीर महत्वहीन है। लोग आत्मा की चिंता नहीं करके जीवन की शारीरिक की भौतिक सुख-सुविधाओं को अधिक महत्व देते है।
