Bikaner Bikaner District Rajasthan साहित्य एवं कला

कवि-कथाकार स्वर्णकार की दो पुस्तकों पर चर्चा

साहित्यकार का कार्य समाज में समरसता ,समन्वय एवं संवेदना स्थापित करना
बीकानेर। अखिल भारतीय साहित्य परिषद की बीकानेर इकाई द्वारा पाठक पर्व मासिक श्रृंखला के अंतर्गत कवि – कथाकार राजाराम स्वर्णकार की दो पुस्तकों पर चर्चा स्थानीय नागरी भंडार स्थित महारानी सुदर्शना कला दीर्घा में आयोजित की गई। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. उमाकांत गुप्त एवं विशिष्ट अतिथि डॉ. विमला डुकवाल थी। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉक्टर अखिलानन्द पाठक ने की। इस आयोजन में राजाराम स्वर्णकार के कविता संग्रह तीसरी आंख का सच की समीक्षा हास्य व्यंग्य कवि बाबूलाल छंगाणी बमचकरी और कहानी संग्रह बिंध गया सो मोती की समीक्षा शिक्षाविद-साहित्यकार डॉक्टर मूलचंद बोहरा ने की। मंचीय उद्बोधन देते हुए डॉ. विमला डुकवाल ने कहा साहित्य समाज के लिए आवश्यक होता है जो पीढी को गढ़ सकता है। मुख्य अतिथि डॉ. उमाकांत गुप्त ने कहा कि साहित्य समाज को शिक्षित और परिष्कृत करने का तत्व है। किसी शर्तों में बांधकर साहित्य सृजन संभव नहीं होता, अगर ऐसा होता है तो वो साहित्य की श्रेणी में नहीं विज्ञापन के समकक्ष होता है। साहित्य में रचने वाले के मौलिक विचार से ही वो मौलिक साहित्य की श्रेणी में आएगा अन्यथा वो मांग पर तैयार प्रोडेक्ट से अधिक कुछ नहीं, इससे प्रत्येक साहित्यकार को बचना अति आवश्यक है। ये काम स्वर्णकार की लेखनी में स्पष्ट झलकता है।
अध्यक्षता करते हुए डॉ. अखिलानंद पाठक ने कहा कि साहित्य का कार्य समाज में समरसता ,समन्वय एवं संवेदना स्थापित करना है, राजाराम स्वर्णकार की कहानियों में समाज और परिवार को जोड़ने का संदेश दिया गया है। भारतीय संस्कारों को प्रतिस्थापित करने वाली कहानी नेह की सरिता के माध्यम से जात -पांत को हटाकर प्रेम स्नेह और संवेदना को स्थापित किया गया है। समाज का समग्र विकास तभी होगा जब हम मूल्यपरक, संस्कारपरक शिक्षा कहानियों के माध्यम से नई पीढ़ी में पहुंचाएंगे, राजाराम जी ने यह कामअपने साहित्य में बखूबी किया है।
पुस्तक चर्चा में अपनी बात रखते हुए लेखक कवि-कथाकार राजाराम स्वर्णकार ने कहा कि मैंने यथार्थ में जो अनुभूत किया, जिस जीवन शैली को नजदीक से देखा, मेरे आस-पास के वातावरण में जो घटित हुआ उस कथानक को मैंने अपनी कविताओं एवं कहानियों में सहज और सरल शब्दों में ढालने का प्रयास किया है। राजाराम स्वर्णकार की पुस्तकों की चर्चा में सहभागिता करते हुए वास्तु मार्तंड के के शर्मा ने राजाराम स्वर्णकार द्वारा रचित कहानी संग्रह की कहानियों का कथानक बहुत ही कसावट लिए हुए है, उसके नारी पात्र जीवन की विभिन्न विकट स्थितियों का सामना कर रहे हों, यह परिस्थितियां चाहे पारिवारिक संबंधों की विषमता की हों या आर्थिक तंगी की हों लेकिन उन्होंने संस्कारों को नहीं छोड़ा मजबूरी में भी चरित्र को धूमिल नहीं होने दिया। यह कहानी संग्रह वर्तमान परिपेक्ष्य में एक उत्कृष्ट मार्ग दर्शक के रूप में उभर कर सामने आया है। कार्यक्रम का शानदार संचालन मोनिका गौड़ ने किया।साहित्य परिषद बीकानेर इकाई द्वारा आभार ज्ञापन डॉ. अखिलानंद पाठक ने किया।

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