Bikaner Bikaner District Rajasthan

27 हजार बीघा गोचर उजड़ने की और गतिमान

पर्यावरण का विनाश होने से खत्म हो जाएगी वन संपदा एवं जैव विविधता
बीकानेर। छोटी काशी के नाम से विख्यात बीकानेर की जैव विविधता एवं पर्यावरण पर संकट साफ दिखाई दे रहा है भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड मत्स्य पालन पशु पालन डेयरी मंत्रालय भारत सरकार के मानद प्रतिनिधि श्रेयांस बैद ने सक्षम स्तर पर लिखे पत्र में बताया कि हम सभी ने कोरोना काल में ऑक्सीजन के लिए लोगों को मरते हुए देखा है उसी ऑक्सीजन के टैंक कहे जाने वाले सरेह नथानिया की करीब 27 हजार बीघा गोचर उजड़ने की और गतिमान है।
शहरीकरण का अमलीजामा पहनाने के लिए गोचर को उजाड़ने से वन संपदा एवं जैव विविधता खत्म हो जाएगी राजाओं के समय में गोचर भूमि में एक तृण उठाना भी पाप समझा जाता था गायों के महत्वपूर्ण स्थान की सृजनात्मकता पर आए ऐसे खतरे से सोचते हुए भी बहुत दुख हो रहा है। प्रो.अनिल कुमार ने बताया कि गोचर केवल लम्बे चौड़े क्षेत्र में फैला भूभाग ही नहीं, यह इंसान से लेकर जीव-जंतुओं, कीट पतंगों, सरीसृपों और पक्षियों की जीवन रेखा है।
गौचर की जमीन नष्ट होने से वन्य जीवों एवं गाय जो हमारी सांस्कृतिक विरासत है एवं आजीविका का मूल स्रोत है उनके चरण के स्थान पर मंडरा रहे खतरे से उनका जीवन यापन खतरे में पड़ जाएगा गोचर को बचाने के लिए समक्ष स्तर पर पत्र प्रेषित किया है।

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