

आठ कर्मों पर ध्यान एवं अध्यात्म साधना की भूमिका पर हुई वर्कशॉप
बीकानेर। जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (जीतो) के तत्वावधान में आठ कर्मों पर केंद्रित वर्कशॉप का आयोजन किया गया। वर्कशॉप में समणी निर्वाणप्रज्ञाजी एवं समणी चौतन्यप्रज्ञाजी ने प्रतिभागियों के साथ चिंतन, अध्यात्म तथा जीवन में आने वाली विभिन्न परिस्थितियों के समाधान को लेकर संवाद किया। वर्कशॉप के दौरान आठ कर्मों की अवधारणा, उनके प्रभाव तथा आत्मिक विकास में ध्यान एवं अध्यात्म साधना की भूमिका पर विस्तार से चर्चा हुई। समणीजी ने कहा कि व्यक्ति के जीवन की अनेक परिस्थितियां उसके कर्मों एवं मानसिक अवस्था से प्रभावित होती हैं। ऐसे में स्वयं के भीतर झांकना, विचारों को समझना तथा नियमित ध्यान एवं साधना का अभ्यास जीवन को अधिक सहज बनाने में सहायक हो सकता है। प्रतिभागियों को ध्यान से जुड़े विभिन्न सूक्ष्म प्रयोग भी करवाए गए। समणी निर्वाणप्रज्ञाजी एवं समणी चौतन्यप्रज्ञाजी ने सरल उदाहरणों के माध्यम से प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया। करीब डेढ़ घंटे चली वर्कशॉप में नियमित ध्यान एवं अध्यात्म साधना से जुड़ने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में अध्यात्म को व्यवहारिक जीवन से जोड़ने तथा उसे दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने पर विशेष जोर दिया गया।
