

परोपकार से बड़ा कोई पुण्य नहीं
बीकानेर। परोपकार से बड़ा कोई पुण्य नहीं है । जो व्यक्ति स्वयं की चिंता न कर परोपकार के लिए कार्य करता है वही सच्चे अर्थों में मनुष्य है। इसी पंक्ति को चरितार्थ किया है। राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय सिंधु में कार्यरत प्रधानाध्यापक राजेंद्र बिश्रोई ने। उन्होंने अपने विद्यालय में अध्यनरत कक्षा एक से आठ के समस्त 180 विद्यार्थियों को पानी की बोतल अपनी तरफ से वितरित की। उनके इस नेक कार्य पर सीबीईओ नोखा ने कहा कि परोपकार का अर्थ है दूसरे की भलाई करना। परमात्मा ने हमें जो भी शक्तियां व सामर्थ्य दिए हैं वे दूसरों का कल्याण करने के लिए दिए हैं। प्रकृति के प्रत्येक कण-कण में परोपकार की भावना दिखती है। सूर्य ,चंद्र ,वायु ,पेड़- पौधे ,नदी, हवा ,बादल सभी बिना किसी स्वार्थ के सेवा में लगे हुए हैं । हर एक व्यक्ति का दायित्व है कि वह संसार को उतना तो अवश्य लौटा दें। जितना उसने इससे लिया है। इस दौरान विद्यालय के समस्त कार्मिकों सहित एसएमसी सदस्यों ने इस कार्य हेतु प्रधानाध्यापक का आभार व्यक्त किया।
