

नगर स्थापना दिवस पर मांडणा-रंगोली में झलकी लोक संस्कृति की रंगत
बीकानेर। नगर स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित पांच दिवसीय उछब थरपणा के तीसरे दिन मांडणा एवं रंगोली बनाने का आयोजन किया गया। इस अवसर पर साहित्यकार मालचंद तिवाड़ी ने कहा कि हमारी परंपरागत लोक कला एवं लोक संस्कृति को समर्पित यह आयोजन अपने आप में अनूठा है। इसमें रंगों की रंगत और भावनाओं की संगत के साथ युवा प्रतिभाओं ने एक से बढ़कर एक मनमोहक मांडणा और रंगोली उकेरे। कमल रंगा ने कहा कि मांडणा-रंगोली हमारी सांस्कृतिक विरासत है और इसे आध्यात्मिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण अंग भी माना जाता है। उन्होंने बताया कि सभी मांडणे और रंगोली मानवीय भावनाओं के प्रतीक होते हैं। इस मौके पर राजेश रंगा, आशीष रंगा, हेमलता व्यास सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
