

साकरिया की जयंती पर संगोष्ठी आयोजित
बीकानेर। रोटरी राजस्थानी शोध संस्थान पुस्तकालय के प्रांगण में आचार्य बद्री प्रसाद साकरिया की जयंती पर आयोजित संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए डॉ. मदन सैनी ने कहा कि आचार्य जी विभिन्न भाषाओं के ज्ञाता थे। इनका संपूर्ण जीवन प्रेरणा देने वाला और उदाहरण सदृश्य था। इस अवसर पर डॉ. सैनी ने अपने शोध ‘राजस्थानी में राम काव्य’ पर कार्य करते वक्त उनके साथ बिताये गये क्षणों को संस्मरण भी सुनाया।
इसी क्रम में डॉ. कृष्ण लाल बिश्नोई ने कहा कि अपनी साहित्यक यात्रा में बीकानेर प्रवास को उन्होने स्वर्णकाल बताया। राजस्थान भारती का संपादन, हरिरस, राजस्थानी शब्द कोश व टैस्सीटोरी पर भी उन्होने विस्तृत कार्य किया। राजेन्द्र जोशी ने संगोष्ठी में सहभागिता निभाते हुए कहा कि राजस्थानी भाषा के दुर्लभ शब्दों को अपने राजस्थानी शब्द कोश के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाने का कार्य साकरिया जैसा व्यक्ति ही कर सकता है। उन्हांने कहा कि ऐसी कोई भी विधा नहीं और न ही ऐसा कोई रस है जिस पर उन्होने कार्य नहीं किया हो।
डॉ. नमामी शंकर ने अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि साहित्य संसार इस प्रेरक मौन साधक साहित्यकार, प्रेमा…. स्वभाव और सामाजिक कार्यकर्ता तथा कर्तव्यनिष्ठा से जुडे गुणों के कारण उनको सदैव याद करता रहेगा। संगोष्ठी में रोटरी क्लब के कोषाध्यक्ष व विशेष अतिथि के रूप में बोलते हुए मनमोहन कल्याणी ने कहा कि अपने बीकानेर प्रवास के दौरान उन्होने अपने निजी पुस्तकालय को रोटरी क्लब को भेंट कर अनुगृहीत कार्य किया हैं। अध्यक्षता करते हुए रोटरी क्लब के अध्यक्ष सुनील सारडा ने कहा कि आचार्य बद्रीप्रसाद जी साकरिया राजस्थानी के गौरव पुरुष थे। संगोष्ठी में डॉ. मोहम्मद फारूख, सुभाष बिश्नोई, राजीव बिश्नोई, मुनीष बजाज, विमलचन्द भोजक व महेन्द्र सिंह राठौड़ आदि ने सहभागिता निभाई।
