

धर्म ही जीने की कला सिखाता है
बीकानेर। संथारा साधिका तारा देवी बैद की स्मृति सभा में उद्बोधन देते हुए मुनि कमल कुमार स्वामी ने कहा कि संसार में जैन धर्म ही ऐसा धर्म है जो जीने की कला के साथ मरने की भी कला सिखाता है। मृत्यु को महोत्सव मनाने की कला केवल जैन दर्शन में है। उन्होंने कहा कि तारा देवी धार्मिक, उपरान्त कषायी, सेवाभावी तथा सादगी पूर्ण जीवन जीने वाली महिला थी। इस अवसर पर जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा गंगाशहर से पवन छाजेड़, लूणकरण छाजेड मांगीलाल बोथरा आदि उपस्थित थे।
