

परमात्मा का स्तुति-वंदना करें तथा सांसारिक मोह माया के बचे
बीकानेर। ढढ्ढा चौक क्षेत्र की ढढ्ढा कोटड़ी में गच्छाधिपति आचार्य प्रवर श्री जिन मणि प्रभ सूरीश्वरजी महाराज के आज्ञानुवर्ती गणिवर्य श्री मेहुल प्रभ सागर म.सा.ने , बुधवार को प्रवचन में भगवान आदिनाथ का गुजराती स्तवन सिद्धा चलना वासी, विमला चलना वासी, जिन जी प्यारा, आदिनाथ ने वंदन हमारा’’ सुनाते हुए कहा कि भविष्य को ध्यान में रखते हुए वर्तमान काल को सुधारे । परमात्मा का स्तुति-वंदना करें तथा सांसारिक मोह माया के बचे। उन्होंने कहा कि मनुष्य तीन तरह की मोह माया में फंसकर आत्म-परमात्म को भूल जाता है तथा अनेक तरह के पापों से कर्म बंधन बांधकर 84 लाख योनियों में भटकाव का मार्ग बना लेता है। श्रद्धालु भगवान आदि नाथ के स्तवन ;;जिन जी प्यारा, आदिनाथ ने वंदन’’ हमारा सहित अनेक स्तुतियां, स्तवन घर व मंदिरों में करते है, लेकिन भाव भरी इन स्तुतियों के संदेश के अनुसार जीवन नहीं बनाते । सांसारिक मोह माया में लोग फंस कर आयुष्य पूरा कर लेते है।
