

स्थापना दिवस पर सुरों की महफ़िल
बीकानेर। आनन्द संगीत कला संस्थान के बैनर तले स्थापना दिवस के अवसर पर आनन्द भवन, सुनारों की गुवाड़ में एक भव्य संगीत संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण छत पर प्रस्तुत “कीन्नो अटकीयोड़ो” शीर्षक से सजी सुरमयी महफ़िल रही, जिसमें कलाकारों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां देकर उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरे वातावरण में संगीत के सुरों की मधुर गूंज और तालियों की गड़गड़ाहट देर तक सुनाई देती रही। कार्यक्रम की अध्यक्षता राजाराम स्वर्णकार ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में जयपुर से पधारी डॉ. ज्योति सारस्वत और विशिष्ट अतिथि महेंद्रकुमार दाधीच (श्री डूंगरगढ़) उपस्थित रहे। अतिथियों का स्वागत पुष्पमाला, शॉल एवं संगीत साहित्य भेंट कर सम्मानपूर्वक किया गया। संगीत संध्या में शास्त्रीय संगीत की विभिन्न रागों पर आधारित “छत पर कीन्नो अटकीयोड़ो” गीत की प्रस्तुतियां चौतन्य सहल, प्रेरणा पंचारिया, खुशी पंचारिया, मोनिका, महक एवं कोमल द्वारा दी गईं, जिन्हें श्रोताओं ने खूब सराहा। इसके अलावा गीता सोनी, ज्ञानेश्वर सोनी एवं गौरीशंकर सोनी ने भी अपनी मधुर प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को और अधिक समृद्ध बनाया। इस अवसर पर अध्यक्ष राजाराम स्वर्णकार ने अपने संबोधन में कहा कि “संगीत अनुराग और विराग का उमड़ता हुआ प्रवाह है, जो साध्य तक पहुंचने का सशक्त साधन है।” उन्होंने संगीत के आध्यात्मिक और भावनात्मक महत्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में नेमकंवरी देवी, मंजू देवी, मोनिका सोनी, मोहनलाल सोनी एवं पंडित विनीत कुमार शर्मा ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए संस्थान की गतिविधियों की सराहना की। अंत में प्रेमरतन स्वर्णकार ने सभी अतिथियों, कलाकारों एवं श्रोताओं के प्रति आभार प्रकट किया।
