

ध्यान से शरीर, मन, बुद्धि और चित्त को किया जा सकता है सुदृढ़
बीकानेर। श्रीलालेश्वर महादेव मंदिर शिवमठ, शिवबाड़ी में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के षष्ठम दिवस भगवान की भक्ति, भक्तों की एकाग्रता और ध्यान के महत्व का प्रसंग हुआ। कथा प्रवाहक स्वामी सच्चिदानंदगिरी महाराज ने कहा कि भगवान सदैव अपने भक्तों की ओर दृष्टिपात करते हैं। भगवान के सच्चे भक्त भी अपनी दृष्टि को संभालकर रखते हैं और उनकी दृष्टि इधर-उधर चंचल नहीं होती। उन्होंने कहा कि भक्ति के मार्ग पर मन और इंद्रियों की एकाग्रता आवश्यक है। विमर्शानंदगिरी महाराज ने कहा कि जो मनुष्य अपने शरीर को सुदृढ़, मन को शांत, बुद्धि को तीक्ष्ण और चित्त को एकाग्र करना चाहता है, उसे ध्यान करना चाहिए। ध्यान के माध्यम से मनुष्य अपने भीतर की शक्तियों को जागृत कर सकता है और इसी जन्म में परमपिता परमेश्वर का साक्षात्कार करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। विजेन्द्र सिंह भाटी ने बताया कि श्रीमद् भागवत कथा का समापन सप्तम दिवस को होगा।
