

सांस्कृतिक सृजन पखवाड़े के तहत साहित्यिक परिचर्चा आयोजित
बीकानेर। केंद्रीय कानून मंत्री ने कहा कि यदि कोई अपनी मातृभाषा में बात रखें तो उसकी तर्क क्षमता में 30 प्रतिशत तक वृद्धि होती है। श्री मेघवाल मंगलवार को राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी तथा स्व. भगवान दास किराडू नवीन समिति की ओर से आयोजित परिचर्चा ’राजस्थानी भाषाः शैक्षणिक और आर्थिक विकास’ को संबोधित करते हुए यह बात कही। मेघवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर देश और प्रदेश में सेवा पखवाड़ा मनाया जा रहा है। कला, संस्कृति, साहित्य और पुरातत्व विभाग द्वारा इसके तहत पूरे पखवाड़े कार्यक्रम आयोजित करना अच्छा कदम है। उन्होंने कहा कि राजस्थानी और दूसरी भाषाओं के विकास पर आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में यह सामने आया कि मातृभाषा में तर्क करने वाले अपनी बात और अधिक बेहतर तरीके से रख सकता है। मधु आचार्य ने कहा कि जिन प्रदेशों ने अपने बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा मातृभाषा में दिलाई, वे प्रदेश अधिक गति से आगे बढ़े। राजस्थान को भी इस दिशा में कार्य करना चाहिए। उन्होंने बताया कि अकादमी की मासिक पत्रिका जागती जोत का प्रकाशन नियमित कर दिया गया है। इस दौरान कमल रंगा, राजेंद्र जोशी और पृथ्वी राज रतनू ने विचार रखे। कार्यक्रम में डॉ. सत्यप्रकाश आचार्य, डॉ. नमामी शंकर आचार्य, डॉ. गौरी शंकर प्रजापत, गंगाबिशन बिश्नोई, ओम सोनगरा, रवि पुरोहित, योगेंद्र पुरोहित, संजय जनागल, संपत पारीक आदि मौजूद रहे।
