

माया से मुक्ति केवल भगवान की शरणागति से
बीकानेर । कलयुग में पार्थिव शिव लिंग की पूजा से ही असीम फल की प्राप्ति होती है। जो व्यक्ति शुद्ध हद्धय से और विधि- विधान के साथ एक करोड़ पार्थिव शिव लिंग की पूजा करता है, उसकी मुक्ति निश्चित ही हो जाती है। इस प्रकार के अनेक रहस्य से भरे मुक्ति के मार्ग को प्रशस्त करते अनेकानेक ज्ञानोपदेश देकर भक्तों को शिव महिमा की विस्तृत जानकारी कथाव्यास श्री श्याम सुंदर महाराज ने श्रद्धालु भक्तों को दी।
बंशीलाल राठी की बगेची में शिव पुराण की कथा सुन भक्त भाव- विभोर हो गए।
आयोजनकर्ता गौरीशंकर सारड़ा ने बताया कि आज की कथा में श्याम सुंदर महाराज ने कहा कि माया से मुक्ति केवल भगवान की शरणागत होने से ही हो सकती है। शिव उपासना में बिल्व पत्र, भस्मी, रुद्राक्ष, आक, धतूरे आदि का महत्व भी प्रतिपादित किया।
महाराज ने कहा कि व्यक्ति को अहंकार नहीं करना चाहिए। अहंकार पतन का कारण होता है। अहंकार में व्यक्ति अंधत्व को प्राप्त करता है। अहंकार से ही सब दोष उत्पन्न होता है। इसी संदर्भ में नारायण ने नारद का विश्वमोहन रूप धारण कर सारा अहंकार भस्म किया। जिसकी विस्तृत कथा महाराज जी ने बताई।
