

जोशी ने अधिवेशन में आधुनिक चुनौतियों पर दिया जोर
बीकानेर। भारतीय प्रौढ़ शिक्षा संघ,नई दिल्ली एवं कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस, कलिंगा विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर के संयुक्त तत्वावधान में तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन बुधवार को प्रारंभ हुआ। पहले सत्र में शिक्षाविद-साहित्यकार और भारतीय प्रौढ़ शिक्षा संघ के एसोसिएट सचिव राजेन्द्र जोशी ने सम्बोधित किया। जोशी ने आजीवन सीखने की अवधारणा में के.सी.चौधरी का योगदान विषय पर चर्चा करते हुए कहा कि देशभर में साक्षरता आंदोलन को गति देने, शिक्षा और साक्षरता में आने वाले बदलाव को चौधरी ने बहुत पहले पहचान लिया था। उन्होंने आधुनिक चुनौतियों जैसे डिजिटल युग, बदलते पाठ्यक्रम और व्यक्तिगत विकास पर जोर दिया। जोशी ने आजीवन अधिगम पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि निरक्षरता उन्मूलन में भारतीय प्रौढ़ शिक्षा और के.सी चौधरी के प्रयास अब दूरस्थ क्षेत्र में स्पष्ट रूप से धरातल पर दिखाई देने लगे है। अधिवेशन देशभर के 200 से अधिक शिक्षाविद भाग ले रहे है। सत्र में मंच पर प्रोफेसर एल. राजा प्रोफेसर एन. के. अम्बसट, सुरेशखण्डेलवाल,पी. ए. रेडी,एवं प्रोफेसर राजेश का सानिध्य रहा।
