

महावीर के संदेशों को जीवन में उतारें, मानव जन्म को व्यर्थ न गंवाएं
बीकानेर। आचार्य रामलाल म.सा. सेवा सदन में आयोजित प्रवचन में राजेश मुनि ने श्रद्धालुओं से श्रमण भगवान महावीर की वाणी और संदेशों को अपने जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कषायों से दूर रहकर समभाव के साथ जीवन व्यतीत करते हुए शाश्वत की प्राप्ति के लिए निरंतर पुरुषार्थ करना ही मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य है। प्रवचन के दौरान उन्होंने “नर चोला अनमोल रत्न, विरथा खो न जाए” तथा “घटते-घटते-घटती री उमरियां” भजनों का मुखड़ा सुनाते हुए कहा कि मनुष्य जन्म अत्यंत दुर्लभ है। यह आत्मकल्याण और परमात्मा की प्राप्ति के लिए मिला है, इसलिए इसे व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। राजेश मुनि ने कहा कि वर्तमान भौतिकवादी और विज्ञापनों के दौर में जो आकर्षक स्वरूप और तथाकथित सत्य प्रस्तुत किया जाता है, वह वास्तव में एक भ्रमजाल है। उन्होंने श्रद्धालुओं से बाहरी दिखावे और मोह-माया से दूर रहकर आत्मचिंतन, संयम तथा आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाने का संदेश दिया।
