

वैचारिक गोष्ठी : टैगोर का राजस्थानी से था गहरा साहित्यक रिश्ता
बीकानेर। गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर की 164वीं जयंती के अवसर पर राजस्थानी युवा लेखक संघ द्वारा एक विशेष विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। वैचारिक गोष्ठी ‘राजस्थानी अर रवीन्द्र नाथ टैगोर’ विषय पर बतौर मुख्य वक्ता अपने विचार व्यक्त करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा ने कहा कि गुरुवर टैगोर का राजस्थानी के साथ एक साहित्यक एवं आत्मिक गहरा रिश्ता था, गुरुवर राजस्थानी साहित्य और संस्कृति की मुक्तकंठ से प्रशंसा करते रहे, उन्होने राजस्थानी गीतों एवं दोहों में वीरतापूर्ण भाव को हमेशा रेखांकित किया।
गोष्ठी में अपने विचार व्यक्त करते हुए कवि गिरीराज पारीक ने कहा कि गुरुवर ने राजस्थानी साहित्य में वीरता और साहस के चित्रण की हमेशा प्रशंसा की है। इसी कड़ी में शिक्षाविद् राजेश रंगा ने कहा कि रवीन्द्रनाथ टैगोर का राजस्थानी एवं राजस्थान से एक रिश्ता और था, वे 1927 में भरतपुर में 30 व 31 मार्च को प्रवास पर रहे। गोष्ठी में विशेषकर शिक्षाविद् सहभागी रहे उनमें से अशोक शर्मा ने कहा कि रवीन्द्रनाथ टैगोर विशेषकर राजस्थानी लोकगीतों के प्रशंसक रहे महावीर स्वामी ने कहा कि गुरुवर राजस्थानी भाषा के लोक साहित्य को भारतीय लोक साहित्य में अनूठा बताया था।
गोष्ठी में महावीर स्वामी, दिनेश व्यास, आशीष रंगा, विजयगोपाल पुरोहित, सुनील व्यास, सुनील शर्मा सहित अनेक सहभागियों ने अपने विचार रखते हुए गुरुवर को राजस्थानी का हित चिंतक बताया।
