Bikaner Bikaner District Rajasthan साहित्य एवं कला

गीतों का गजरा कार्यक्रम आयोजित

चेतक री टापां सुणियोडी, राणा री आतम सांसां, ’पीथल री पाती रा आखर, ऊंचा धोरां आकासां
बीकानेर। राष्ट्रभाषा हिंदी प्रचार समिति द्वारा संस्कृति भवन में रविवार को ’गीतों का गजरा’ सजाया गया। कवि अनिल कुमार ‘रजन्यंश’ ने “मन के मन के टूटे सब तार मन के, ठन के ठन के छूटे सब यार ठन के..“ सुनाकर खूब दाद बटोरी तो श्रृंगार रस का स्वरचित प्रतिनिधि गीत सुनाकर श्रोताओं को भाव विभोर किया। अनिल ने इंस्टाग्राम पर तंज कसते हुए जीवन में बढ़ते तकनीकी दखल पर चिंता भी जताई। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि डॉ. विमला महरिया ने मधुर स्वर में लोकगीत बावनिया सुनाकर हंसाया व लोकसंस्कृति की झलक सजाई। विमला ने होली के रंग पर व्यंग्य सुनाया जिसमें बढ़ती तकनीक के कारण होली का रंग फीका पड़ जाने को केंद्रित किया। कवि प्रदीप महरिया ने भी आज की राजनीति पर कटाक्ष करते हुए नेता और भ्रष्टाचारी को राजस्थानी गीत में अच्छा लपेटा। वहीं कार्यक्रम में मुख्य अतिथि छैलू चारण ‘छैल’ ने करणी आराधना से काव्यपाठ प्रारंभ किया और वात्सल्य रस पर भावभरा छंद सुनाया। छैल ने राजस्थानी भाषा को मान्यता नहीं मिलने का दोष राजनीति को देते हुए ‘नेतावां को करें गणुगान निज मान भूल गया..’ का ओलमा भी लिखने वालों को दिया। छैल ने श्रृंगार रस में भी सुनाया। संस्था द्वारा सभी कवियों का सम्मान किया गया।
ये रहें शामिल
गीतों का गजरा कार्यक्रम में काव्य प्रेमी लोगों ने भाग लिया व काव्य रस का आनंद लिया। संस्था मंत्री रवि पुरोहित, डॉ मदन सैनी, सत्यनारायण योगी, रामचन्द्र राठी, नारायण सारस्वत, महेश जोशी, महावीर सारस्वत, तुलसीराम चोरड़िया, विजय महर्षि, सरोज शर्मा, मनसा सोनी, पवन सारस्वत, विश्वनाथ तंवर, अब्दुल शकूर सिसोदिया, पूनमचंद गोदारा, प्रदीप कुमार दीप, बुधमल सैनी, संजय पारीक, शुभकरण पारीक, मुकेश कुमार, राज सर, अमित सहित अन्य लोग उपस्थित रहें।

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