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राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता आज की आवश्यकता

राज्य स्तरीय राजस्थानी भाषा पुरस्कार समारोह संपन्न
बीकानेर। व्याकरणिक, वैज्ञानिक एवं साहित्यिक दृष्टि से सांगोपांग राजस्थानी भाषा को अब राजस्थान सरकार से राज्य की दूसरी भाषा का दर्जा और भारत सरकार से संवैधानिक मान्यता मिल जानी चाहिए, क्योंकि देश और प्रदेश दोनों जगह एक ही दल की सरकार है। श्री कला-डूंगर कल्याणी राजस्थानी शिखर पुरस्कार से वरिष्ठ साहित्यकार जानकीनारायण श्रीमाली सुदीर्घ समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हुए हैं, इन्हें संघ और सरकार का ध्यान इस ओर प्राथमिकता से आकृष्ट करवाना चाहिए। उक्त उद्गार प्रख्यात समाजसेवी एवं ‘श्रमणोपासक’ पत्रिका के संपादक रहे चम्पालाल डागा ने व्यक्त किए। श्री डागा रोटरी क्लब, बीकानेर की ओर से रविवार को क्लब सभागार में आयोजित दसवें राज्य स्तरीय राजस्थानी भाषा पुरस्कार समारोह में अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि मातृभाषा राजस्थानी भाषा की समृद्धि और इसकी संवैधानिक मान्यता के लिए बीकानेर से अभूतपूर्व प्रयास हुए हैं। हमें अपने घर-परिवार में भी बोलचाल के रूप राजस्थानी को ही अधिक महत्व देने की आवश्यकता है।
समारोह के मुख्य अतिथि और रोटरी क्लब के पूर्व प्रांतपाल राजेश चूरा थे। पृथ्वीराज रतनू ने समारोह के उद्देश्य बताते हुए कहा कि पुरस्कार की पूर्ण पारदर्शिता के साथ ऐसे साहित्यकारों को पुरस्कृत करती है, जिन्हें कोई बड़ा अकादमिक सम्मान नहीं मिलता, लेकिन उनका लेखन जमीन से जुड़ा हुआ होता है। समारोह में जानकीनारायण श्रीमाली को उनकी उत्कृष्ट साहित्य सेवा के लिए 51,000 की नकद राशि का ‘कला-डूंगर कल्याणी राजस्थानी शिखर पुरस्कार’ प्रदान किया गया। चूरू के राजस्थानी कथाकार राजेन्द्र शर्मा ‘मुसाफिर’ को उनके व्यंग्य-संग्रह ‘सत्त बोल्या गत है’ के लिए 21,000 रुपए का ‘खींवराज मुन्नीलाल सोनी राजस्थानी गद्य पुरस्कार’ तथा जोधपुर की डॉ. सुमन बिस्सा को उनके कविता-संग्रह ‘अंतस रा सुर सांतरा’ पर 11,000 रुपए का ‘ब्रज-उर्मी अग्रवाल राजस्थनी पद्य पुरस्कार’ भेंट किया गया। इसी प्रकार केकड़ी (अजमेर) की श्रीमती विमला नागला को उनके बाल कथा-संग्रह ‘हेत रो परवानो’ के लिए 7,000 रुपए की राशि का ‘सुंदरदेवी तुलसीदास हर्ष राजस्थानी बाल साहित्य पुरस्कार’ प्रदान किया गया। पुरस्कृत साहित्यकारों का परिचय समारोह संयोजक रोटे. मनमोहन कल्याणी, रोटे. श्रीगोपाल सोनी, रोटे. सुनील गुप्ता, अंबुज गुप्ता एवं रोटे. विजय हर्ष ने प्रस्तुत किया।

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