परोपकार से बड़ा कोई पुण्य नहीं
परोपकार से बड़ा कोई पुण्य नहीं बीकानेर। परोपकार से बड़ा कोई पुण्य नहीं है । जो व्यक्ति स्वयं की चिंता न कर परोपकार के लिए कार्य करता है वही सच्चे अर्थों में मनुष्य है। इसी पंक्ति को चरितार्थ किया है। राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय सिंधु में कार्यरत प्रधानाध्यापक राजेंद्र बिश्रोई ने। उन्होंने अपने विद्यालय में
