

पुस्तक प्रदर्शनी व चर्चा: नई पीढ़ी ने पुस्तकों को बताया सच्चा मित्र
बीकानेर। विश्व पुस्तक दिवस के अवसर पर प्रज्ञालय संस्थान द्वारा हिन्दी एवं राजस्थानी साहित्य की विभिन्न विधाओं पर आधारित पुस्तकों की प्रदर्शनी एवं पुस्तक-संस्कृति पर केन्द्रित एक सार्थक चर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साहित्य प्रेमियों के साथ-साथ नई पीढ़ी के बालक-बालिकाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और पुस्तकों के प्रति अपनी रुचि व्यक्त की। प्रदर्शनी में साहित्य की विविध विधाओं—कहानी, कविता, उपन्यास, निबंध और लोक साहित्य—की पुस्तकें आकर्षण का केंद्र रहीं। नई पीढ़ी के विद्यार्थियों ने बड़े उत्साह के साथ पुस्तकों का अवलोकन किया और उन्हें पढ़ने के अनुभव साझा किए। चर्चा के दौरान एक युवा पाठक ने कहा कि “पुस्तकें वास्तव में हमारी सच्ची मित्र होती हैं। आज के डिजिटल युग में भले ही हम ई-बुक्स पढ़ते हैं, लेकिन छपी हुई पुस्तक को पढ़ने का अनुभव कहीं अधिक सुखद और आत्मीय होता है।” कार्यक्रम में साहित्यकार कमल रंगा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन न केवल पुस्तक संस्कृति को बढ़ावा देते हैं, बल्कि वर्तमान समय में उत्पन्न हो रहे ‘पाठक संकट’ से उबरने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी बनते हैं। उन्होंने कहा कि पुस्तकों के प्रति रुचि जागृत करने के लिए ऐसे प्रयास निरंतर होते रहने चाहिए। इस अवसर पर क़ासिम बीकानेरी, राजेश रंगा और गिरिराज पारीक सहित अन्य साहित्य प्रेमियों ने भी अपने विचार रखे और पुस्तक पढ़ने की परंपरा को जीवित रखने पर जोर दिया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि बदलते समय और तकनीकी प्रगति के बावजूद पुस्तकों का महत्व आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना पहले था। नई पीढ़ी में पुस्तकों के प्रति बढ़ती रुचि इस बात का संकेत है कि साहित्य और ज्ञान की यह धारा निरंतर प्रवाहित होती रहेगी।
