

224वां भिक्षु चरमोत्सव मनाया
बीकानेर। गंगाशहर स्थित तेरापंथ भवन में साध्वी त्रिशलाकुमारी के सान्निध्य में 224वां भिक्षु चरमोत्सव श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम में आचार्य भिक्षु के जीवन, व्यक्तित्व एवं साधना पर वक्ताओं ने प्रकाश डाला। साध्वी त्रिशलाकुमारी ने कहा कि आचार्य भिक्षु विलक्षण व्यक्तित्व के धनी थे। ‘मर पूरा देस्यां, पर आतमा रा कारज सारस्यां’ के संकल्प के साथ उन्होंने धर्म के क्षेत्र में चरण न्यास किया और अपने जीवन को आत्मकल्याण एवं धर्म साधना के लिए समर्पित किया। साध्वी सम्यक्त्वयशा ने आचार्य भिक्षु के बहुआयामी व्यक्तित्व को रेखांकित करते हुए कहा कि आचार्य भिक्षु की प्रतिभा बेजोड़ थी और उनकी साधना अद्वितीय थी। उन्होंने कहा कि आचार्य भिक्षु का जीवन त्याग, तपस्या, साधना और आध्यात्मिक दृढ़ता का प्रेरणास्रोत है। इस अवसर पर साध्वी कल्पयशा, साध्वी रश्मिप्रभा, साध्वी पवन, छाजेड़, संजु लालाणी, देवेन्द्र डागा, करणीदान रांका सहित उपस्थित श्रद्धालुओं ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने सहभागिता की।
