

गिद्ध संरक्षण के लिए जागरूकता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण जरूरी
बीकानेर। राजस्थान पशुचिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, बीकानेर के वन्यजीव प्रबंधन एवं स्वास्थ्य अध्ययन केंद्र की ओर से अंतर्राष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस के अवसर पर विशेषज्ञ व्याख्यान एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. सुमंत व्यास ने कहा कि गिद्ध पारिस्थितिकी तंत्र के अत्यंत महत्वपूर्ण घटक हैं। इनके संरक्षण के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण, जन-जागरूकता तथा पशुचिकित्सा एवं वन्यजीव क्षेत्र के बीच समन्वय आवश्यक है।
प्रो. मनीषा माथुर ने कहा कि गिद्ध प्रकृति के स्वच्छता प्रहरी हैं और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। डॉ. जे.पी. कच्छावा ने बताया कि गिद्ध मृत पशुओं के शवों का प्राकृतिक रूप से निस्तारण कर पर्यावरण को स्वच्छ रखने के साथ संभावित रोगों के प्रसार को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम के अंत में प्रो. प्रवीण बिश्नोई ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के संकाय सदस्य एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
