

फड़ चित्रकला कार्यशाला में युवाओं को मिली लोककला की गहरी समझ
बीकानेर। अजित फाउण्डेशन द्वारा आयोजित लोककला फड़ चित्रकला कार्यशाला में मुख्य प्रशिक्षक डॉ. राकेश किराडू ने कहा कि हर कलाकार के लिए लोककलाओं से जुड़े रहना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जब तक कलाकार लोक संस्कृति को नहीं समझेगा, तब तक वह अपनी सांस्कृतिक पहचान को भी पूरी तरह नहीं जान पाएगा। उन्होंने फड़ चित्रकला के बारे में बताते हुए कहा कि यह समृद्ध लोककला आज केवल राजस्थान के भीलवाड़ा क्षेत्र तक सीमित होती जा रही है। इसे जन-जन तक पहुंचाने के लिए गंभीर प्रयास करने की आवश्यकता है, ताकि यह पारंपरिक कला समाप्त न हो। कार्यशाला के दौरान जयश्री सुथार, निशा सुथार एवं राम भादाणी ने प्रतिभागियों को मानव आकृति चित्रण एवं तकनीकी पहलुओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया और उन्हें बारीकी से इस कला की विधियों से अवगत कराया। संस्था समन्वयक संजय श्रीमाली ने कार्यक्रम की शुरुआत में कार्यशाला के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा कि एक सप्ताह तक चलने वाली इस कार्यशाला में “करके सीखने” के सिद्धांत पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य लोककला के संरक्षण एवं संवर्धन को बढ़ावा देना है। इस फड़ चित्रकला कार्यशाला में लगभग 52 युवा-युवतियां उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं और पारंपरिक कला को सीखने में गहरी रुचि दिखा रहे हैं।
