

श्रीमद्भागवत कथा में कृष्ण-रुक्मिणी विवाह एवं सुदामा चरित्र का भावपूर्ण वर्णन
बीकानेर। सतु महाराज की कोटड़ी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह एवं सुदामा चरित्र का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भगवान की दिव्य लीलाओं का रसपान कर भाव-विभोर हो उठे। कथा प्रवक्ता पंडित अभय चन्द्र व्यास ने भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य विवाह प्रसंगों का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान ने धर्म की स्थापना, भक्तों के कल्याण तथा अधर्म के विनाश के लिए आठ प्रमुख रानियों के साथ विवाह किया। उन्होंने रुक्मिणी विवाह प्रसंग की व्याख्या करते हुए भगवान के प्रति समर्पण, प्रेम और भक्ति के महत्व को रेखांकित किया। सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए पंडित व्यास ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता निस्वार्थ प्रेम, सच्चे स्नेह और आत्मीय संबंधों का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने बताया कि भगवान अपने भक्तों के प्रेम के आगे स्वयं को समर्पित कर देते हैं और सच्ची श्रद्धा का प्रतिफल अवश्य प्रदान करते हैं। कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति भाव में डूबे रहे तथा श्रीकृष्ण की लीलाओं का श्रवण कर आध्यात्मिक आनंद का अनुभव किया। आयोजनकर्ता सांवरिया सेठ समिति के सदस्यों ने बताया कि कथा के उपरांत श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त किया।
